VPN क्या है? जानिए इसके बारे में विस्तार से -TechGuruHindi

by - February 07, 2020

vpn kya hai in hindi

इस इंटरनेट के दौर में हम सब के दैनिक कार्य भी इंटरनेट पर होने लग गए हैं। जिसके चलते इंटरनेट के यूजर्स की संख्या भी दिन-भर-दिन बढ़ती ही जा रही है। जिस तरह इंटरनेट पर यूजर्स लगातार बढ़ते जा रहें हैं उसी तरह इंटरनेट पर हैकर्स भी लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। ऎसे में इंटरनेट पर हम सबका डाटा सुरक्षित है या नहीं? इस बात की चिंता हम सबको हमेशा रहती है। लेकिन समस्या जैसी भी हो उसका कोई-न-कोई हल भी होता ही है। ठीक उसी प्रकार इस समस्या का हल VPN है। जी हाँ, हम सब VPN के इस्तेमाल से इंटरनेट पर अपना डाटा सुरक्षित रख सकते हैं। लेकिन कई लोग ये नहीं जानते की VPN क्या होता है और इसे कैसे इस्तेमाल करते हैं? तो दोस्तों अगर आप भी VPN के बारे में जानना चाहते हैं तो आप हमारी इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़ें। तो आइए दोस्तों जानते हैं -


VPN क्या है?

VPN की फुल फॉर्म 'वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क' (Virtual private network) है। VPN एक ऐसे नेटवर्क का कनेक्शन है जो इंटरनेट पर आपके डाटा को सुरक्षित और गोपनीय रखता है। इसके इस्तेमाल से आप अपने डाटा को लीक होने से और हैक होने से बचा सकते हैं। इसका इस्तेमाल कम्पनीज(Companies) और कार्यालयों (Offices) जैसी जगहो पर भी अपने डाटा को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।

कुछ देशों में सरकार कुछ वेबसाइटस के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा देती है यानि कि कुछ वेबसाइटस को Ban कर देती है और यदि हम उन प्रतिबंधित(Banned) वेबसाइटस को Access करने की कोशिश करते हैं तो वे वेबसाइटस Access ही नहीं होंगी और अगर कोई उन प्रतिबंधित(Banned) वेबसाइटस को बार-बार जबरदस्ती Access करने की कोशिश करेंगे तो उस यूजर पर कार्यवाही भी हो सकती है। लेकिन हम VPN का इस्तेमाल करेंगे तो हम अपने डिवाइस के IP Address को बदलकर किसी दूसरे देश के IP Address का इस्तेमाल कर सकते हैं जिसके चलते हम अपने देश की सभी प्रतिबंधित वेबसाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं और हमपर किसी भी तरह की कोई कार्यवाही भी नहीं होगी।


VPN कैसे काम करता है?

मान लीजिए हमें किसी वेबसाइट पर विजिट करना है तो वो request हमारे IP Address के द्वारा ISP(इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर) के पास जाती है और फिर वो ISP हमारी request को उस वेबसाइट के Server तक पहुँचाती है उसके बाद हमारे device में वो वेबसाइट खुलती है। अगर हम किसी बैन वेबसाइट को access करना चाहें तो ISP(इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर) हमारे IP address की request को उन बैन वेबसाइट के सर्वर तक पहुँचने ही नहीं देगी जिसके चलते हम उन बैन वेबसाइट को access नहीं कर पाएंगे।

VPN के इस्तेमाल से हम सब बैन वेबसाइटस को access कर सकते हैं क्योंकि VPN सबसे पहले हमारे IP Address को बदलता है यानि कि अगर हम अपने डिवाइस में VPN को connect करके किसी बैन वेबसाइट पर जाना चाहें तो VPN हमारे डिवाइस के IP Address को ISP(इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर) के द्वारा दूसरे IP Address से कनेक्ट कर देता है। यानि कि हम घर बैठे अपने location के नेटवर्क को किसी दूसरे देश के location के नेटवर्क से बदल सकते हैं। जिसके चलते हमारे ISP (इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर) को केवल ये खबर रहती है कि इस यूजर ने अपने IP Address को दूसरी IP Address से connect किया है और दूसरे IP Address से कनेक्ट होने के बाद आपने किस-किस वेबसाइट को access किया उसकी जानकारी हमारे ISP(इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर) के पास नहीं पहुँचती है। जिसके चलते आप अपने देश की किसी भी प्रतिबंधित(Banned) वेबसाइट को VPN के इस्तेमाल से access कर सकते हैं और इसके इस्तेमाल से आपकी निजी जानकारी भी सुरक्षित रहती है।


यह भी पढ़ें - VPN का इस्तेमाल कैसे करते हैं?


VPN का इस्तेमाल करने के फायदे और नुकसान -

फायदे -

  • कई देशो में कुछ वेबसाइटस के इस्तेमाल पर प्रतिबंध(Ban) होता है लेकिन VPN के इस्तेमाल से सभी प्रतिबंधित(Banned) का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • कंप्यूटर में ज्यादातर VPN के सॉफ्टवेयर्स paid होते हैं लेकिन android फ़ोन के ज्यादातर VPN Apps को फ्री में गूगल प्ले स्टोर से install करके इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • कई बार Public area के Wifi नेटवर्क का इस्तेमाल सुरक्षित नहीं माना जाता है क्योकि इससे जानकारी लीक होने का खतरा रहता है लेकिन VPN के इस्तेमाल से आप Public area के Wifi नेटवर्क का सुरक्षित उपयोग कर सकते हैं।
  • VPN के इस्तेमाल से आपका IP Address छिप जाता है जिसके चलते आपकी निजी जानकारी हैकर्स तक नहीं पहुँचती और आपका डिवाइस सुरक्षित रहता है।

नुकसान -

  • VPN का इस्तेमाल करने पर भी यूजर अपने आप को पूर्ण रूप से नहीं छिपा सकता है क्योकि उन फ्री VPN प्रोवाइडर्स के पास उस VPN यूजर का डाटा मौजूद रहता है।
  • इसके इस्तेमाल से आपकी इंटरनेट की स्पीड थोड़ी-सी धीमी हो सकती है।

VPN के प्रकार

  1. Remote Access VPN
  2. Site-to-Site VPN
Remote Access VPN इसका इस्तेमाल अपने नेटवर्क को निजी रखने और इंटरनेट की हर प्रकार की सुविधाओं का उपयोग करने के लिए किया जाता है। कई बार हम जिस क्षेत्र में रहते हैं उस क्षेत्र में इंटरनेट की कुछ चीजों पर प्रतिबंध होता है अथवा कुछ वेबसाइटस पर प्रतिबंध(BAN) होता है लेकिन आप इसके इस्तेमाल से इंटरनेट पर लगे हर प्रतिबंध से बच सकते हैं और जो लोग इंटरनेट पर अपनी सुरक्षा बढ़ाना चाहते हैं अथवा इंटरनेट पर सुरक्षित रहना चाहते हैं वे लोग भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका इस्तेमाल घरेलू और व्यवसायिक दोनों जगहों पर किया जा सकता है।

Site-to-Site VPN का इस्तेमाल एक निश्चित स्थान के नेटवर्क को दूसरे निश्चित स्थान के नेटवर्क के साथ सुरक्षित रूप से जोड़ने के लिए किया जाता है। इसलिए इसे राउटर-टू-राउटर VPN भी कहा जाता है। उदहारण के लिए यदि एक बड़ी कंपनी है जिसकी बहुत सारी Branch है और वो कंपनी अपनी एक Branch से दूसरे Branch पर सुरक्षित रूप से जुड़ना चाहते हैं तो वो Site-to-Site के चलते ही सुरक्षित रूप से एक दूसरे से जुड़ पाते हैं। इसका इस्तेमाल ज्यादातर कार्यालयों और बड़ी कम्पनीज में किया जाता है।


VPN के प्रोटोकॉल के प्रकार -


1. Internet Protocol Security इसे IPSec के नाम से भी जाना जाता है। IP Network में सुरक्षित संचार करने के लिए इसे उपयोग किया जाता है।

2. Layer 2 Tunneling Protocol इसे L2TP के नाम से भी जाना जाता है। ये 2 L2TP कनेक्शन के बीच सुरंग बनाता है जिसके अंदर IPSEC जैसे सुरक्षा प्रोटोकॉल डाटा को सुरक्षित करने का कार्य करते हैं।

3. Point-To-Point Tunneling Protocol इसे PPTP के नाम से भी जाना जाता है। ये एक point से दूसरे point तक एक ऐसी सुरंग बनाता है जिसके अंदर डाटा सुरक्षित रूप से point से दूसरे point तक पहुँच जाता है।

4. Secure Socket Layer इसे SSL के नाम से भी जाना जाता है। एक तरह से ये सुरक्षा प्रोटोकॉल है जिसके चलते सुरक्षित रूप से ऑनलाइन मनी ट्रांसक्शन किया जाता है। किसी भी वेबसाइट का URL जो http:// से शुरू होता होता है वो SSL के चलते https:// से शुरू होता है।

5. OpenVPN एक ऐसा VPN है जो Site-to-Site और Point-to-Point के साथ कनेक्शन बनाने के लिए खुल स्रोत है।

6. Secure Shell इसे SSH के नाम से भी जाना जाता है यह एक ऐसा प्रोटोकॉल है जो नेटवर्क की एक गोपनीय सुरंग बनाने का कार्य करता है जिसके जरिए सुरक्षित डाटा ट्रांसफर किया जाता है।


दोस्तों हमें उम्मीद है कि आप VPN के बारे में अच्छे से जान चुके होंगे। आपको हमारी इस पोस्ट में दी हुई जानकारी कैसी लगी ये हमें कमेंट करके जरूर बतायें और इसे शेयर करना बिल्कुल भी न भूलें।

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